Shiv Tandav Lyrics

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्‌॥

जटा कटा हस्तभायावकुण्डलवान्‌
केशः पाशाः दधानो हृदये कपालम्‌।
दर्पणं चारुधोरणीनिलिप्तकस्तूरिकम्‌
स्मरान्तकं पुण्डरीकायताक्षमेधे॥

जटातवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्‌॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्‌।
त्रैलोक्यगर्भगभस्थले शशिभाले
द्युतिमान्‌ द्योतिमान्‌ आत्मनां पश्यामि॥

इति दिग्विजये भूमिनिलये
मनो विलसन्मन्दिरे निपतन्नगे।
वमन्तं अनङ्गहस्तं विलसन्तं
मनोहरे मनोहरं स्वमाम्बाजे॥

These lyrics are in Sanskrit and depict the majestic and powerful dance of Lord

Shiva, known as the “Tandava.” The Tandava is a dance associated with creation, preservation, and destruction, symbolizing the cosmic cycles.

FAQ


1.शिव तांडव कब पढ़ना चाहिए?


शिव तांडव कब पढ़ना चाहिए?शिव तांडव स्तोत्र का पाठ प्रातः काल या प्रदोष काल करना चाहिए। सबसे पहले स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिव जी को प्रणाम करें और धूप, दीप और नैवेद्य से उनका पूजन करें। रावण ने पीड़ा के कारण इस स्तोत्र को बहुत तेज स्वर में गाया था।

2.शिव तांडव स्तोत्रम कैसे याद करें?

शिव तांडव स्तोत्रम् को सीखने के लिए सबसे पहले आपको अर्थ और उच्चारण समझने के लिए इसे 5-6 बार सुनना होगा। सुनने के बाद स्तोत्र का अभ्यास और वादन साथ-साथ करते रहें। गाते समय स्तोत्रम सीखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे आपको इसे जल्दी याद करने में मदद मिलेगी।

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